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भाजपा शासनकाल में नहीं सुरक्षित नजर आ रहे विशेष समुदाय के लोगों के शव व कब्रिस्तान*

 

*सुर्खियों में रहने वाली जानकीपुरम पुलिस पर उठा एक बहुत बड़ा सवालिया निशान*

राजधानी लखनऊ जानकीपुरम थाना क्षेत्र के अंतर्गत मिर्जापुर गांव में 22 सितंबर को देर शाम विशेष समुदाय की महिला के शव को गांव के पास खाली पड़ी कब्रिस्तान के नाम से रजिस्टर्ड सरकारी जमीन पर दफनाने कुछ लोग पहुंचे थे ।जिसका गांव के दूसरे समुदाय के लोगों द्वारा पूर्णता विरोध किया जा रहा था। वहीं सूत्रों की मानें तो ग्राम प्रधान अनवर ने अपने समर्थकों के द्वारा 100 वर्ष से सरकारी कब्रिस्तान होने की बात कहकर शव दफन करवाया था। जिसकी शिकायत दूसरे समुदाय के लोगों द्वारा उच्च अधिकारियों से करने पर ग्राम प्रधान अनवर व 20 से 25 अज्ञात लोगों के ऊपर संगीन धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया था।

*आखिरकार क्यों दो दिन बाद आधी रात को 100 वर्ष पूर्व से रजिस्टर्ड कब्रिस्तान से कब्र खोद कर निकाला गया शव*

सूत्रों की मानें तो मामले को तूल पकड़ता देख स्थानीय पुलिस की मदद से रातो रात 22 सितंबर को दफन शव को 24 सितंबर की रात बड़ी ही गोपनीय तरीके से कब्र खोदकर कब्र से शव को निकाला गया एवं रात करीब 1:30 बजे वहां से कुछ ही दूरी पर स्थित निर्धारित कब्रिस्तान में शव को दफन किया गया था। रात ही रात बिना किसी आदेश के कब्रिस्तान मे कब्र से शव को बाहर निकाला तथा निर्धारित कब्रिस्तान में शव को दफन करवाने को लेकर जानकीपुरम पुलिस शक के घेरे में आती नजर आ रही है।

आखिरकार किन कारणों से 100 वर्ष पूर्व कब्रिस्तान के नाम से रजिस्टर्ड जमीन से, बड़ी ही गोपनीय तरीके से शव को बाहर निकाला गया। घटना की जानकारी लेने पहुंचे पत्रकारों से जानकीपुरम थाना प्रभारी ने गोल मटोल बातें करते हुए प्रकरण को साफ-साफ छिपाते हुए कहा,नहीं हुई ऐसी कोई घटना नहीं दर्ज हुई कोई एफ आई आर आखिरकार जानकीपुरम थाना प्रभारी किन कारणों से प्रकरण को छिपाने का प्रयास कर रहे है।
सूत्रों की अगर मानें तो इस मामले में एक मोटी रकम पुलिस प्रशासन द्वारा ली गई

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