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पुलिस विभाग की गाड़ियों में सर्विस के नाम पर कमिशनखोरी की खुशबू

अब इसे क्या कहा जाए…

आंखों में धूल झोंकना या फिर पूरी लाल मिर्च…
बिल के बिल पास हो जाते हैं लेकिन चेक नही किया जाता है कि आखिर रेट क्या लगाया गया है…

सीधे सीधे अगर समझा जाए तो इसे कमिशनखोरी ही कहा जायेगा….

सीधे सीधे अगर समझा जाए तो इसे कमिशनखोरी ही कहा जायेगा….लखनऊ के थाना मड़ियांव की पीआरवी यूपी 32 डीजी 4572 की सर्विस कराई गई…*उसमे एक कब्जा जो डिग्गी में लगाया गया है उसका रेट ₹1600/-लगाया गया है।*ये करामात किया गया है निशातगंज पेपरमिल कॉलोनी स्थित *निशातगंज मोटर वर्कशॉप* नामक दुकान ने…साथ ही साथ एक गाड़ी में लेबर चार्ज के रूप में ₹2,450 लगाया जाता है…अब सोचने वाली बात है कि ये भुगतान किन मानकों के आधार पर तय किया जाता है…अगर सही से जोड़ा जाए तो सैकड़ो/हज़ारो की तादात में गाड़ियां है जिनका साल में करोड़ो में बिल बनता होगा…बिल एसएसपी लखनऊ के नाम पर जारी किया जाता है…अब इसकी जिम्मेदारी भी एसएसपी साहब की है कि कृपया इसकी जांच भी कराई जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो जाये..एसएसपी महोदय..कृपया इस मामले को संज्ञान में लें..आखिर पैसा तो जनता की मेहनत का है…

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